कासगंज: यहाँ से जिस पार्टी का विधायक, सरकार उसी की
प्रतीकात्मक फोटो: साभार इसे संयोग कहें या कुछ और. पर बीते चुनावों पर नजर डालें तो पता चलता है कि जिस पार्टी ने यह सीट जीती, यूपी में सरकार उसी की बनी. यहाँ के लोग कहने लगे हैं कि काश! यहाँ का चुनाव नतीजा पहले आ जाता तो इस बार भी सरकार बनने की जानकारी पहले ही मिल जाती. जी हाँ, यूपी कासगंज विधानसभा सीट का सच यह भी है. यहाँ मतदान हो चुका है. यहां की लड़ाई इसी कारण से दिलचस्प है. पिछले चार दशकों में जिस भी पार्टी का उम्मीदवार यहां से जीता, सरकार उसी की बनी. 2007 में कासगंज से बीएसपी की टिकट पर जीते हसरत उल्लाह शेरवानी इस बार समाजवादी पार्टी की साइकिल पर सवार हैं. तब 'हाथी' का ज़ोर चला था और प्रदेश में मायावती की सरकार बनी थी. इनको लगता है कि ये अखिलेश के लिए भी खुशकिस्मत साबित होंगे. कासगंज के आंकड़े भी इस संयोग को पुख्ता करते हैं. 1974 से अब तक यहां जिस पार्टी की उम्मीदवार जीता, सरकार उसी की बनी. हालाँकि, वर्ष 1996 में ऐसा नहीं हुआ. कल्याण सिंह यहाँ से जीते जरूर और बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी भी बनी लेकिन गठजोड़ की राजनीति के तहत तब एसपी-बीएसपी की सरकार बनी. भरोसा नहीं है...