सेनाध्यक्ष की नियुक्ति पर उठे सवाल, 33 साल बाद एक बार फिर वरिष्ठता नजरंदाज
नवनियुक्त सेनाध्यक्ष जनरल विपिन रावत देश के अगले सेनाध्यक्ष विपिन रावत की नियुक्ति पर सवाल उठाने लगे हैं. कांग्रेस और सीपीआई (एम) ने कहा है कि आर्मी चीफ की नियुक्ति में वरिष्ठता का ख्याल नहीं रखा गया. रावत से वरिष्ठ कई अधिकारी सेना के पास हैं, बावजूद इसके रावत को सेनाध्यक्ष बना दिया गया. 33 साल बाद एक बार फिर से यह परम्परा टूटी है, जो देश हित में नहीं है. कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने ट्विटर पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आर्मी चीफ की नियुक्ति में वरिष्ठता का ख्याल क्यों नहीं रखा गया? क्यों लेफ्टिनेंट जनरल प्रवीण बख्शी और लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद अली हरीज की जगह बिपिन रावत को प्राथमिकता दी गई? उन्होंने कहा कि पूर्वी सेना के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल प्रवीण बख्शी सेना प्रमुख जनरल दलबीर सिंह के बाद सबसे वरिष्ठ है. दक्षिणी सेना कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरीज अगले सबसे वरिष्ठ हैं. तिवारी ने दावा किया है कि लेफ्टिनेंट जनरल रावत तीसरे नहीं बल्कि चौथे वरिष्ठ हैं. यहां तक कि मध्य कमांड के सेना कमान के लेफ्टिनेंट जनरल बीएस नेगी उनसे वरिष्ठ हैं. वहीं सीपीआई (एम) पोलित ब्यूरो क...