दुनिया से विदा लेने वाले पर्यावरणविद अनुपम मिश्र अब केवल यादों में बसेंगे
अनुपम मिश्र : फ़ाइल फोटो साभार सुबह अख़बारों के पन्ने पलटते हुए यह खबर आई. यह तो नहीं कह सकता कि मैं उन्हें ठीक से जानता था, पर हाँ, एक बार मिलने का अवसर जरुर मिला. उस समय पर्यावरण के प्रति उनका लगाव, जलसंरक्षण के प्रति उनका अनुराग मुझे भा गया. पहली ही मुलाकात में उनसे मिला प्यार भी मैं कभी नहीं भूल सकता. फिर मिलने के वायदे के साथ मैं विदा लेकर वहां से निकला, फिर दोबारा मिल नहीं सका और सुबह उनके निधन की खबर ने हमें झकझोर दिया. जी हाँ, मैं जाने-माने गांधीवादी, पत्रकार, पर्यावरणविद् और जल संरक्षण के लिए अपना पूरा जीवन लगाने वाले अनुपम मिश्र की ही बात कर रहा हूँ, जो सोमवार हमेशा-हमेशा के लिए हमें छोड़ चले गए. दिल्ली के एम्स में उन्होंने अंतिम साँस ली. वे 68 बरस के थे. उनके निधन की खबर फैलते ही उनके तमाम प्रशंसक दिल्ली के गांधी शांति प्रतिष्ठान में जुटना शुरू हो गए. कापी लिखे जाने तक श्री मिश्र के अंतिम संस्कार की तैयारी चल रही थी. दिल्ली के निगम बोध घाट पर यह कार्यक्रम तय है. हिंदी के प्रख्यात कवि, लेखक भवानी प्रसाद मिश्र के बेटे अनुपम बीते एक बरस से प्रोस्टेट कैंसर से जूझ रहे थे....