अयोध्या में मंदिर बनना चाहिए. एक हिन्दू और अयोध्यावासी होने के नाते मैं भी यही चाहता हूँ. मेरे अयोध्या के मुस्लिम साथी ठीक वैसे ही मस्जिद चाहते हैं, जैसे मैं मंदिर. पर, एक पढ़ा-लिखा इंसान होने के कारण लगता है कि मेरे सोचने और जमीनी हकीकत में नदी के दो पाटों जैसा फासला है. खाली मेरे या किसी समूह के सोचने मात्र से तो ऐसा बिलकुल नहीं होगा. हम लोकतंत्र में विश्वास करते हैं. हमारा अपना संविधान है. उसी के अनुरूप हम सबको चलना है. जो लोग संविधान, कानून के हिसाब से नहीं चलते, उन्हें कानून अपराधी करार देता है. इस सच को जानने के बावजूद संतों का समूह, विश्व हिन्दू परिषद् और गाहे-बगाहे मंदिर समर्थक यह बात उठाते रहते हैं कि अमुक तारीख से मंदिर निर्माण शुरू हो जाएगा. अयोध्या का प्रतीकात्मक चित्र -साभार जब हम ऐसा कहते हुए सुनते हैं, पढ़ते हैं, तो बरबस सूत न कपास, जुलाहन में लठ्ठमलठ्ठ वाली देशी कहावत याद आ जाती है. और यह भी पता चलने लगता है कि चुनाव आने वाले हैं. सभी जानते हैं कि मामला अदालत में है. और जब तक वहां से फैसला नहीं आ जाता, तब तक अयोध्या में विवादित परिसर में एक ईंट रखना किसी के ब...
Comments
Post a Comment